सीआरसी गोरखपुर में विश्व न्याय दिवस के उपलक्ष में हुआ संगोष्ठी का आयोजन
सीआरसी गोरखपुर में वर्ल्ड सोशल जस्टिस डे के उपलक्ष में आज 13 मार्च 2020 को एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया इस अवसर पर उद्घाटन सत्र के दौरान विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव राहुल सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा कि न्याय हर किसी के लिए बिना भेदभाव के उपलब्ध होना चाहिए यह एक निष्पक्ष प्रक्रिया है जो सभी को समानता का अधिकार प्रदान करती है जिसमें चीफ जस्टिस मुख्य संरक्षक की भूमिका में है तथा प्रत्येक जिले में त्वरित न्याय के लिए जिले स्तर पर विधिक सेवा प्राधिकरण की स्थापना की गई है। गोरखपुर में यहां दीवानी कचहरी में स्थापित है बहुत जल्द गोरखपुर में मेगा लीगल कैंप का आयोजन किया जाएगा जिसमें कोई भी व्यक्ति अपने समस्या के लिए प्रार्थना पत्र देकर न्याय की मांग कर सकता है। प्रथम वक्ता के रूप में अपना उद्बोधन देते हुए प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय गोरखपुर इकाई से जुड़ी कुमारी पारुल दीदी ने कहा कि न्याय सभी को समानता का अधिकार प्रदान करता है यह संविधान द्वारा प्रदत्त एक न्यायिक प्रक्रिया है इसी क्रम में स्माइल रोटी बैंक के आजाद पांडे, अमरनाथ जयसवाल तथा सक्षम के प्रमोद दुबे , वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीमती सुनीता श्रीवास्तव, ललिता श्रीवास्तव, रोली मैडम ने भी संबोधित किया, इसी क्रम में गोरखपुर विश्वविद्यालय गोरखपुर के राजनीति शास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ गोपाल प्रसाद जी ने कहा कि सीआरसी भारत सरकार और प्रदेश सरकार का एक संयुक्त प्रतिष्ठान है। उन्होंने कहा कि किसी भी सभ्य समाज की पहचान उसके कार्यों से होती है तथा किसी भी देश का संविधान उस देश के लिए एक धर्म ग्रंथ के समान है। सभा को संबोधित करते हुए पूर्व महापौर डॉ. सत्य पांडे ने कहा कि न्याय प्रक्रिया के दौरान हमें खुद ही सोचना होगा कि हमने प्रकृति समाज, पशु पक्षियों के साथ क्या पूर्ण न्याय किया है और यह कहां तक न्याय संगत है। अंत में संगोष्ठी को संबोधित करते हुए सीआरसी के निदेशक डॉ. रमेश कुमार पांडेय सीआरसी की भूमिका पर विस्तार से चर्चा करते हुए बताया कि सीआरसी गोरखपुर की स्थापना 2 सितंबर 2018 को की गई जिस क्रम में आज यहां विश्व सामाजिक न्याय दिवस के अवसर पर 163 वा कार्यक्रम आयोजित है जो पूर्वांचल के 25 जनपदों के साथ भारत मैं 16 सेक्टरों में विभाजित है। इस अवसर पर विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, समाचार पत्रों के प्रतिनिधि, छायाकार तथा विश्वविद्यालय के शोध छात्र उपस्थित रहे।